खुदरा व्यापार को ‘थोक’ नुकसान ! ५ महीने में रु. १९ लाख करोड़ का फटका

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का प्रकोप छाया हुआ है। हालांकि दुनिया के कई देश अब इससे उबरने लगे हैं मगर हिंदुस्थान में इसका संकट गहराता ही जा रहा है। वायरस के प्रकोप से एक तरफ जहां काफी लोगों की मौतें हो रही हैं, वहीं व्यापार जगत में भी इसका काफी बुरा प्रभाव पड़ा है। इसका सबसे बुरा असर खुदरा बाजार पर पड़ा है, जहां ‘थोक’ में आर्थिक नुकसान हुआ है। बाजार के जानकारों के अनुसार पिछले ५ महीनों में खुदरा बाजार को १९ लाख करोड़ रुपए का फटका लग चुका है।
मिली जानकारी के अनुसार कोरोना वायरस के कारण घरेलू व्यापार में सबसे ज्यादा उथल-पुथल हुई है। हालत यह है कि चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन खुलने के ३ महीने बाद भी देश भर में व्यापारी बड़े वित्तीय संकट, और दुकानों पर ग्राहकों के बहुत कम आने से बेहद परेशान हैं। व्यापारियों को अनेक प्रकार की वित्तीय जिम्मेदारियों को भी पूरा करना है, वहीं ई-कॉमर्स कंपनियां गैर अनुमति वाली वो सब तरीके अपना रही हैं, जिससे देश के व्यापारियों को व्यापार से बाहर किया जा सके। खुदरा बाजार में पैसे का संकट पूरी तरह बरकरार है। हालत यह है कि गत नवंबर-दिसंबर के दिए हुए माल का भुगतान फरवरी-मार्च तक हो जाना चाहिए था पर वो अभी तक नहीं हो पाया है। इस कारण व्यापार संकट में पड़ गया है। मोदी सरकार ने ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का नारा दिया था। लेकिन पिछले ५ महीनों में इज ऑफ डूइंग बिजनेस नहीं ‘इज ऑफ डूबिंग रिटेल बिजनेस’ हो गया है।

कोरोना काल के कारण देश में घरेलू व्यापार अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। खुदरा व्यापार पर चारों तरफ से बुरी मार पड़ रही है। यदि तुरंत इस स्तिथि को ठीक करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो देश भर में लगभग २० फीसदी दुकानों को बंद करने पर मजबूर होना पड़ेगा। इसके कारण बड़ी संख्या में बेरोजगारी भी बढ़ सकती है।
गौरतलब है कि देश भर में खुदरा बाजार की आर्थिक स्थिति विभिन्न राज्यों के २० प्रमुख शहरों से आंका जाता है। ये शहर राज्यों में सामान वितरण के बड़े केंद्र हैं। इनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई, नागपुर, रायपुर, भुवनेश्वर, रांची, भोपाल, सूरत, लखनऊ, कानपुर, जम्मू, कोचीन, पटना, लुधियाना, चंडीगढ़, अमदाबाद, गुवाहाटी शामिल हैं। इन शहरों में व्यापारियों से बातचीत कर ये आंकड़े लिए गए हैं, जिनसे यह साफ दिखाई पड़ता है कि कोरोना ने किस कदर देश के व्यापार को प्रभावित किया है, जो फिलहाल संभलने की स्तिथि में नहीं है। देश के घरेलू व्यापार को अप्रैल में लगभग ५ लाख करोड़ का, जबकि मई में लगभग साढ़े चार लाख करोड़ रुपए और जून महीने में लॉकडाउन हटने के बाद लगभग ४ लाख करोड़ का तथा जुलाई में लगभग ३ लाख करोड़ तथा अगस्त में २.५ लाख करोड़ के व्यापार का घाटा हुआ है। आम आदमी कोरोना को लेकर बहुत ज्यादा डर में है, जिसके कारण स्थानीय ग्राहक बाजारों में नहीं आ रहे हैं, जबकि ऐसे लोग जो पड़ोसी राज्यों या शहरों से सामान खरीदते रहे हैं, वे लोग भी कोरोना से भयभीत होने तथा दूसरी ओर एक राज्य से दूसरे राज्य में परिवहन, रेल आदि की उपलब्धता न होने के कारण से थोक बाजारों में नहीं आ रहे हैं। उदहारण के तौर पर दिल्ली में प्रतिदिन ५ लाख व्यापारी देश के अन्य राज्यों से आते थे किंतु वर्तमान में अन्य राज्यों के व्यापारी दिल्ली आ ही नहीं रहे हैं। इन सब कारणों से देश के रिटेल व्यापार की चूलें हिल गई हैं।

ब्याज का दबाव न डाला जाए
व्यापारियों के संगठन ‘वैâट’ ने केंद्र व सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि वो व्यापारियों की वर्तमान स्तिथि को देखें और देश के खुदरा व्यापार को दोबारा स्थापित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। यदि देश में २० प्रतिशत दुकानें बंद हो गर्इं तो इसका सबसे बड़ा खामियाजा देश की अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ेगा। वहीं राज्य सरकारों के आर्थिक बजट भी पूरी तरह हिल जाएंगे। वैâट ने केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से आग्रह किया है कि फिलहाल व्यापारियों पर ब्याज देने का दबाव बैंकों द्वारा न डाला जाए। इसके लिए बैंकों को निर्देशित करना आवश्यक है। सरकारें अन्य क्षेत्रों के कर्जे माफ करती हैं। हम तो केवल ब्याज अभी न लिया जाए और किसी भी किस्म की पेनल्टी व्यापारियों पर न लगाई जाए, केवल इतनी मांग कर रहे हैं।

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