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मुख्यमंत्री ने किया स्कूल शैक्षणिक वर्ष का शुभारंभ, कोरोना के कारण नहीं रुकनी चाहिए शिक्षा !

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कोरोना के कारण शिक्षा को रोककर विद्याथिर्‍यों का नुकसान न हो, लेकिन विद्याथिर्‍यों के स्वास्थ्य के साथ हम खिलवाड़ भी नहीं कर सकते हैं। इन बातों को ध्यान में रखकर जहां वायरस का प्रसार नहीं है, उन शहरी स्कूलों, ग्रामीण और गैर-ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा शुरू की जानी चाहिए। इन शब्दों के साथ मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने ऑनलाइन और डिजिटल तरीकों को पायलट प्रोजेक्ट रूप में जल्द से जल्द शैक्षणिक वर्ष शुरू करने की मंजूर दी। कल दोपहर स्कूली शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ की मौजूदगी में हुई एक बैठक में, मुख्यमंत्री ने इस बात को दोहराया कि अगर एक बार स्कूल शुरू नहीं होते हैं, तो भी शिक्षा शुरू होनी चाहिए। इस मौके पर मुख्य सचिव अजोय मेहता, शालेय शिक्षण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव वंदना कृष्णा, उच्च शिक्षण विभाग के सचिव सौरव विजय आदि उपस्थित थे। जिन स्थानों पर प्रत्यक्ष रूप से स्कूल शुरू हो रहे हैं, वहां विद्याथिर्‍यों के स्वास्थ्य की पूरी सावधानी बरतने की बात मुख्यमंत्री ने कही।

शुरू करने का प्रस्ताव
रेड जोन में न रहनेवाले ९,१०,१२ वीं तक के स्कूल-कालेज जुलाई तक, ६ वीं से ८ वीं तक के अगस्त तक, वर्ग ३ से ५ वीं के सितंबर तक, वर्ग १ से २ तक के स्कूल व्यवस्थापन समिति की मान्यता, ११ वीं का वर्ग अगले महीने दसवीं के परीक्षा परिणाम आने के बाद शुरू करने के प्रस्ताव किए गए हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का एक पायलट प्रोजेक्ट टाटा स्काई और जियो की मदद से शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ कंपनियों द्वारा अन्य राज्यों में किए गए प्रयोगों की परिणाम की जांच की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोंकण में चक्रवात के कारण क्षतिग्रस्त हुए स्कूलों को तत्काल मरम्मत के लिए धनराशि दी जाएगी। इसके लिए शिक्षा विभाग ने २८ करोड़ रुपये के फंड की मांग की है।

ग्राम कोरोना प्रतिबंधक समिति, शिक्षकों पर बड़ी जिम्मेदारी
स्कूल शुरू करने के लिए, शुरुआत में स्कूल प्रबंधन समितियों की एक बैठक होगी। गांवों में कोविड निवारण समिति के साथ-साथ स्कूलों में स्थानीय अधिकारियों, स्वच्छता, कीटाणुशोधन, पानी की आपूर्ति आदि विषयों पर चर्चा की जाएगी। समूहों में माता-पिता की बैठकें आयोजित करने से माता-पिता के मन में डर कम किया जाएगा। बाल रक्षक और शिक्षक आउट-ऑफ-स्कूल और प्रवासी कामगारों के बच्चों को उनके घरों में जाने, सरल सिस्टम अपडेट करने और छात्र आधार संख्या भरने, टीवी और रेडियो स्थापित करने के लिए ग्राम पंचायतों की मदद से बिना शिक्षा, गूगल क्लास रूम की मदद के लिए राजी करना, कक्षाओं, डिजिटल प्रायोगिक आधार पर वेबिनार शुरू करना, ई-शैक्षिक सामग्री का उत्पादन, साइबर सुरक्षा, दीक्षा मोबाइल ऐप का उपयोग, छात्रों को स्कूल के वक्ताओं के माध्यम से स्वास्थ्य के बारे में जानकारी रखने आदि पर चर्चा की गई।

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