Vijay Sangharsha

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टैक्स बढ़ाने की राय देनेवाले तीन अधिकारियों पर गिरी गाज !

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देश में कोरोना महामारी के चलते टैक्स में बढ़ोत्तरी करने के सुझावों वाली फोर्स रिपोर्ट के मामले में तीन वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से उनकी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया है। सीबीडीटी सूत्रों के मुताबिक भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी संजय बहादुर, प्रकाश दुबे और प्रशांत भूषण ने अपनी रिपोर्ट में अमीरों के खिलाफ 40 फीसदी टैक्स लगाने, कोरोना महामारी सेस लगाने और विदेशी कंपनियों पर टैक्स बढ़ाने जैसे सुझावों में जो भूमिका निभाई, उससे सरकारी महकमे में एक अनिश्चितता का माहौल का निर्माण हुआ। तीनों अधिकारियों से इस मामले में 15 दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है।

सीबीडीटी सूत्रों के मुताबिक इन अधिकारियों ने फोर्स नाम से टैक्स बढ़ाने के प्रस्तावों पर रिपोर्ट तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। इस रिपोर्ट में वेल्थ टैक्स, कोरोना सरचार्ज जैसे टैक्स लगाने की वकालत की गई थी। विभाग का ये भी मानना है कि इस रिपोर्ट के जरिए टैक्स कानूनों को लेकर मौजूदा आर्थिक हालात के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया। इन अधिकारियों में 1988 बैच के आईआरएस प्रशांत भूषण हैं जो आईआरएस एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी भी हैं। आरोप है कि इन्होंने बिना किसी अधिकार के रिपोर्ट जनता के बीच साझा किया। एसोसिएशन के ज्वाइंट सेक्रेटरी और डीओपीटी के डायरेक्टर प्रकाश दुबे ने बिना किसी अधिकार से जूनियर अधिकारियों से रिपोर्ट तैयार करने को कहा और रिपोर्ट को आईआरएस एसोसिएशन को भेज दी। साथ ही, 1989 बैच के आईआसएस संजय बहादुर पर भी जूनियर अधिकारियों को गुमराह कर उनसे रिपोर्ट तैयार कराने का आरोप लगा है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि ये सभी अधिकारी बेहद अनुभवी और प्रिंसिपल कमिशनर रैंक के थे और इन्होंने जूनियर अधिकारियों को बहकाने का काम किया। सरकार युवा अधिकारियों के सुझावों पर जरूर ध्यान देती अगर वो नियमों के तहत बनाए गए सिस्टम से आते। इस मामले में रिपोर्ट को देश के हालात की संवेदनशीलता को ताक पर रखकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया गया, जिससे मौजूदा हालात में टैक्स नीतियों को लेकर खलबली मच गई।

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